Activities

केन्द्र के अधिदेश (Mandates):

मूल्यांकन, परिष्करण और निरूपण के माध्यम से प्रौद्योगिक उत्पादों का अंगीकरण ही कृषि विज्ञान केन्द्र का मूल्य अधिदेश है। इस अधिदेश को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने के लिये तथा किसानों के उन्नयन एवं विकास हेतु निम्नलिखित गतिविधियाँ प्रत्येक कृषि विज्ञान के द्वारा संचालित की जाती है।

 

केन्द्र के उद्देश्य (Objectives/Activities):

  1. संतुलित उर्वरकों/सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग, फसलों/सब्जियों में किस्मों का मूल्यांकन और खरपतवार नियंत्रण, बछड़ों/बच्चों में मृत्यु दर पर नियंत्रण, डेयरी पशुओं में सामान्य उर्वरता को विनियमित करने के लिए खनिज और डीवर्मिंग के उपयोग पर ऑन फार्म ट्रेल्स (OFTs) आयोजित करना।
  1. संतुलित उर्वरकों/सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग, किस्मों का मूल्यांकन, फसलों/सब्जियों/ सजावटी पौधों में खरपतवार नियंत्रण, बछड़ों/बच्चों में मृत्यु दर पर नियंत्रण, संतुलित हरा चारा उत्पादन पर फ्रंट लाइन प्रदर्शन (FLDs) आयोजित करना।

 

  1. किसानों, कृषक महिलाओं, प्रसार कार्यकर्ताओं, ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करना, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित नवीनतम तकनीकों पर कुशल प्रशिक्षण।
  1. क्षेत्र दिवस, किसान मेला आयोजित करना, केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों के खेतों/गांवों का दौरा करना।
  1. किसानों को परामर्श और राज्य कृषि विभागों, गैर सरकारी संगठनों आदि के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रतिभाग करके कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों की जानकारी देना।
  1. अनाज/तिलहन/सब्जियों के बीज/पौध का उत्पादन और किसानों को न्यूनतम दरों पर उपलब्धता/बिक्री करना।

 

किसानों को लाभ (Farmers Benefit):

  1. प्रशिक्षणः कृषि विज्ञान केन्द्र कृषक भाईयों, कृषक महिलाओं एवं ग्रामीण युवाओं के लिये आवश्यकता के आधार पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। यह केन्द्र की सबसे महत्त्वपूर्ण क्रिया है। प्रशिक्षण खास कर उन लोगों के लिये आवश्यक है जिन्होंने स्कूल छोड़ दिया है व बेरोजगार हैं। केन्द्र द्वारा ऐसे लोगों को स्वरोजगार देने के लिये मुर्गी पालन, बकरी पालन, डेयरी, मशरूम उत्पादन और मत्स्य पालन आदि का प्रशिक्षण देता है और महिलाओं को सशक्त करने के लिये गृह विज्ञान से संबंधित प्रशिक्षण जैसे- सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, अचार, पापड़ बनाना आदि दिया जाता है।
  1. खेत पर परीक्षणः इसके माध्यम से कृषि विज्ञान केन्द्र किसानों की प्रमुख समस्या का उपचार/समाधान करते हैं। केन्द्र के वैज्ञानिक, किसानों को बताते हैं कि कौन सा बीज उत्कृष्ट है और कौन सी तकनीक सर्वश्रेष्ठ है, इसमें तुलनात्मकता को स्थान दिया जाता है। यह किसानों की भागीदारी अध्ययन का एक रूप है।
  1. अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनः इसके माध्यम से केन्द्र किसानों को नई तकनीक के बारे में बताते हैं, कि कृषक किस प्रकार अपने उत्पादन की लागत को कम, कीट/रोगों का फसल में नियंत्रित, पैदावार को बढ़ाना तथा महिलाओं के परिश्रम को कम करना आदि, कृषि औजार तथा नवीनतम प्रौद्योगिकी उपकरण के उपयोग से कर सकता है।
  1. अन्य विस्तार गतिविधियाँ: कृषि विज्ञान केन्द्र अन्य विस्तार गतिविधियों जैसे किसान मेला, प्रक्षेत्र भ्रमण, किसान गोष्ठी, सेमिनार, कृषि प्रदर्शनी, साहित्य प्रकाशन, मोबाइल द्वारा वॉइस (Whatsapp) मैसेज द्वारा मौसम की जानकारी आदि द्वारा किसानों को नवीनतम तकनीकी जानकारी प्रदान कर उनकी कार्यक्षमता तथा कौशल को बढ़ाता है।

 

केवीके का SWOT (ताकत, कमजोरियां, अवसर और खतरे) विश्लेषणः

  1. ताकतः केवीके, आगरा में आवश्यक वैज्ञानिक / तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध हैं, ओएफटी / एफएलडी आयोजित करने के लिए धन समय पर उपलब्ध है, कुछ प्रदर्शन इकाइयाँ भी प्रभावी प्रशिक्षण उद्देश्य के लिए उपलब्ध हैं।
  1. कमियां: कृषि आदानों की अनुपलब्धता/समय पर उपलब्धता होना।
  1. अवसरः केवीके को मेजबान संस्थान आर.बी.एस. से अच्छा तकनीकी समर्थन प्राप्त है।  केवीके और कॉलेज का स्टाफ अपने ज्ञान को अद्यतन करने के लिए समय समय पर प्रशिक्षण/कार्यशालाओं/सेमिनारों का आयोजन करना।
  1. खतरेः केवीके का क्षेत्राधिकार बहुत विस्तृत है, सिंचाई का पानी समस्या ग्रस्त है और आसानी से उपलब्ध नहीं है।